*सिंहपुर में कागजों में चल रही गांवों की सफाई व्यवस्था *संपादक-डॉ मलखान सिंह
अमेठी:
विकास खंड सिंहपुर में गांवों की साफ-सफाई की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत किए जा रहे दावों के विपरीत जमीनी हकीकत यह है कि सफाई व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
विकास खंड की कुल 58 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी मात्र 38 सफाई कर्मियों के भरोसे है। बड़ी आबादी वाले एक दर्जन से अधिक गांवों में सफाई कर्मियों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसका सीधा असर गांवों की स्वच्छता पर दिख रहा है, जहां जगह-जगह कूड़ा-करकट के ढेर लगे हुए हैं और नालियां गंदगी से भरी पड़ी हैं।
जिन ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मी नियुक्त भी हैं, वहां कई सफाई कर्मियों पर काम न करने के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ सफाई कर्मी गांव में सफाई करने के बजाय प्रधान के यहां उपस्थिति दर्ज कराकर लौट जाते हैं। हालत यह है कि कई गांवों में लोगों को यह तक जानकारी नहीं है कि उनके यहां कौन सा सफाई कर्मी तैनात है।
जियापुर, करनगांव, इन्हौना, सढिय़ां, शेखनगांव, आजादपुर, बहुआ, मिर्जागढ़, खानापुर समेत कई ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक स्थलों, गलियों और नालियों में गंदगी फैली हुई है। नालियों के चोक होने से बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है।
अधिक आबादी वाले गांव सबसे ज्यादा प्रभावित
विकास खंड में 58 ग्राम पंचायतों और 74 राजस्व गांवों के सापेक्ष कुल 49 सफाई कर्मियों की तैनाती दर्शाई गई है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। जानकारी के अनुसार 11 सफाई कर्मियों को ब्लॉक, जिला मुख्यालय और निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया है। शेष बचे 38 सफाई कर्मियों से पूरे क्षेत्र की सफाई कराई जा रही है, जो नाकाफी साबित हो रही है।
इस संबंध में एडीओ पंचायत विजय कुमार यादव का कहना है कि जिन ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मी नियुक्त नहीं हैं, वहां सफाई कार्य टोलियों के माध्यम से कराया जा रहा है। साथ ही सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया गया है।







